मध्यप्रदेश के Guna से अभी-अभी एक बड़ी खबर सामने आई है जहां पर जिंदा व्यक्ति को Guna के जिला अस्पताल में अमृत समझकर पोस्टमार्टम के लिए क्या घर भेज दिया गया, इतना ही नहीं- जिंदा व्यक्ति के पोस्टमार्टम करने की तैयारी भी हो चुकी थी लेकिन जैसे ही सख्त को होश आया वैसे ही वह बिना कपड़ों के ही भाग गया, युवक का कहना था कि यदि उसे होश ना आता तो उसका पोस्टमार्टम आवश्यक हो जाता।
जिंदा व्यक्ति को मृत समझकर करने वाले थे पोस्टमॉर्टम
दरअसल, युवक का कहना है कि उसने 11 मार्च को उसने प्रेम प्रसंग में एक महिला के घर पहुंचकर मानसिक प्रताड़ना के चलते सल्फास (जहर) का सेवन कर लिया था, और उसे अचेत अवस्था में जिला अस्पताल लाया गया था। फिर महिला उसे जिला चिकित्सालय लेकर गई, जहां उसका इलाज किया जा रहा था, और इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया इसके बाद उसके बॉडी का पोस्टमार्टम करने के लिए चीरघर भेजा गया और वहां पर उसे जिंदे व्यक्ति का पोस्टमार्टम होने ही वाला था तभी अचानक से उसे आ गया और वह बिना कपड़ों के ही वहां से भाग गया।
LPG : एलपीजी की खपत 17 प्रतिशत घटी; पेट्रोल 13% और डीजल 8 फीसदी ज्यादा बिका
युवक ने अस्पताल प्रबंधन पर लगे आप
युवक ने 18 मार्च को एक वीडियो वायरल कर जिला अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाए और कहा कि वह जिंदा था, लेकिन अचेत अवस्था में मुझे डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया था, वहां पर पोस्टमॉर्टम की तैयारी की जा रही थी, तभी होश आ गया और नग्न अवस्था में ही भाग गया। और उसने यह भी कहा कि यदि वह वहां से नहीं भागता तो उसके शरीर में चीरे लगा दिए गए होते।
CMHO ने बताया फर्जी मामला
वहीं, इस मामले में CMHO राजकुमार ऋषिश्वर ने बताया कि यह गलत सूचना है. इसमें न डॉक्टरों का नाम है न ही कोई कागजात, अगर कोई कागजात है तो उसकी जांच की जाएगी। युवक को 11 मार्च को भर्ती कराया गया था, जिसने जहरीला पदार्थ खाया था. CMHO ने कहा कि शव को पोस्टमॉर्टम पुलिस भेजती है. फिर एक फॉर्म भी होता है, जिसे भरना होता है. उसके बाद डॉक्टर पीएम करता है. यदि पुलिस के पास भी ऐसे कागज है तो बताएं।
Singrauli News: राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलेंगे सिंगरौली के लाल बहादुर













