सिंगरौली

Sarai Railway Station: सरई रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर जमी कोलडस्ट की मोटी परत से परेशानी

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Sarai Railway Station
Sarai Railway Station: जिले भर के स्टेशनों से कोयले का डिस्पैच किया जाना यात्रियों के लिए घातक होता जा रहा है। स्थितियां ऐसी बन गयी हैं कि दो मिनट का ठहराव होने पर सरई रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म से पानी भी नहीं लिया जा सकता है। यदि प्लेटफार्म में पैर रखा भी गया तो वह कोयले की मोटी परत में छप जाता है और फिर कोलडस्ट में पानी गिरने के बाद स्लिप होने का भी भय बना हुआ है।

यह स्थिति एक दिन की नहीं है, जबसे सरई रेलवे स्टेशन से कोयला डिस्पैच होना शुरू हुआ है, तभी से ऐसी स्थिति है। प्लेटफार्म पर यह समस्या बढ़ती जा रही है। इस स्टेशन से होकर खासतौर पर सिंगरौली-जबलपुर इंटरसिटी के यात्री प्लेटफार्म की इस दुर्गति को प्रतिदिन देख रहे हैं, इसीलिए तो यहां से गुजरते समय अपनी सीट या बर्थ के पास वाली खिड़कियां भी बंद कर लेते हैं। आए दिन रेल यात्री इस समस्या की शिकायत करते हैं कि सरई और गजराबहरा रेलवे स्टेशन से ट्रेन गुजरते समय अजीब की दुर्गंध आती है।

उड़ती हुई कोलडस्ट से मोटी परत प्लेटफार्म पर तो जमा होती ही है। हवा में भी जहरीलेपन एहसास होता है, जो एक भयावह स्थिति है। इसके लिए स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिम्मेदार रीजनल अफसर स्वतः संज्ञान नहीं ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें यह सब दिखाई ही नहीं पड़ता है और यदि देखते हैं तो जिम्मेदारों को स्थिति बताकर उन्हें अपने फेवर में ले लेते हैं।

डम्प कोयले की आग बुझाई जाती है तब स्थिति होती बेहद गंभीर

बताया जाता है गर्मी के दौरान कोयले के डम्प में लगातार आग लगती रहती है, जब इसे बुझाने के लिए जलती हुई आग में पानी डाला जाता है। उस समय की स्थितियों को अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है कि कितनी जहरीली गैसें इस वातावरण में घुलती हैं और कितने डस्ट पार्टिकल्स हवा में मिलते हैं। स्थिति यह बनती है कि बहुत अधिक समय तक डस्ट मास्क लगाकर भी यहां नहीं ठहर सकते हैं।

बार-बार होते आंदोलनों को दबा रहे

इस समस्या को लेकर सरई में दर्जनों बार विरोध प्रदर्शन और आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन खदान से लेकर स्टेशन में कोयला जमा करने और ट्रेन में डिस्पैच करने वाली कम्पनियां जिला प्रशासन की मदद से आंदोलनों को दबा देती हैं। उसके एवज में डस्ट नहीं उड़ने देने अथवा पानी के छिड़काव की अच्छी व्यवस्था तक नहीं की जाती है। दिन-प्रतिदिन यह समस्या बढ़ती जा रही है और गर्मी के सीजन में तो यह जानलेवा हो जाती है।

कमाई के आगे नतमस्तक है पमरे

रेलवे को अपने स्टेशनों, रेल यात्रियों को प्लेटफार्म सहित पूरा परिसर साफ सुथरा देना है, लेकिन मोटी कमाई के आगे पश्चिम मध्य रेल जबलपुर मंडल का प्रबंधन भी नतमस्तक है। स्टेशन के अधिकारी कर्मचारी से लेकर आसपास रहने वाले लोगों को हवा तक शुद्ध नहीं मिल पा रही है। हजारों लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर सिंगरौली, सरई और गजरा बहरा रेलवे स्टेशनों से कोयले का डिस्पैच किया जा रहा है।

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