Singrauli Trauma Centre: जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर का आज मंगलवार को कलेक्टर गौरव बैनल औचक निरीक्षण करने पहुंचे, जहां कलेक्टर कई वार्डो का निरीक्षण किया, वहां साफ-सफाई व वार्डो की एसी खराब होने के चलते सिविल सर्जन कल्पना रवि पर भड़क गये। कलेक्टर ने कहा डॉक्टरों के चेम्बर की एसी खराब नही होती, फिर जिस वार्डो में मरीज भर्ती हैं, वहीं की एसी खराब होती है। इसके अलावा कलेक्टर ने ओपीडी पर्ची में हुई अनियमितता की शिकायत व मरीजो से नर्स का गाली-गलौज पर नाराजगी जाहिर करते हुये हटाने के निर्देश दिये।
कलेक्टर गौरव बैनल ने आज मंगलवार को जिला चिकित्सालय सह ट्रॉमा सेंटर का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न ओपीडी कक्षों सहित अस्पताल के प्रमुख वार्डों का गहन अवलोकन किया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने मेडिसिन, नेत्र एवं आर्थोपेडिक कक्षों का अवलोकन किया। आर्थोपेडिक ओपीडी में चिकित्सक रूटीन ड्यूटी के दौरान अनुपस्थित पाए गए तथा ओपीडी पर्ची एवं रजिस्टर प्रविष्टियों में अंतर पाया गया। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सिविल सर्जन को संबंधित से स्पष्टीकरण प्राप्त कर कार्रवाही करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि ओपीडी काउंटर पर कार्यरत ऑपरेटर द्वारा ओपीडी शुल्क से मुक्त श्रेणी में आने वाले कुछ हितग्राहियो से ओपीडी शुल्क लिया जा रहा है। इस गंभीर लापरवाही पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से पद से पृथक करने तथा ओपीडी पर्ची काउंटर संचालित कर रही संस्था पर कार्रवाही करने के निर्देश दिए । कलेक्टर ने ओपीडी कक्षों के निरीक्षण उपरांत सिविल सर्जन को निर्देशित किया कि सभी कक्षों में रिकॉर्ड संधारण व्यवस्थित रूप से किया जाए तथा प्रत्येक ओपीडी पर्चीधारक की जानकारी संबंधित रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए।
तत्पश्चात कलेक्टर ने इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू, एसएनसीयू, पैथोलॉजी लैब, सर्जिकल वार्ड, जनरल वार्ड, आर्थोपेडिक वार्ड एवं ऑपरेशन थिएटर सहित अन्य प्रमुख वार्डों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल एवं वार्डों में साफ.-सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई। इस पर उन्होंने संबंधित एजेंसी के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुष्पराज सिंह, सिविल सर्जन डॉ. कल्पना रवि आदि मौजूद रहे।
सफाई कराकर हमको वीडियों भेजना
कलेक्टर ने जैसे ही ट्रामा सेंटर के प्रथम तल के गहन शिशु चिकित्सा इकाई के पास पहुंचे और वहां जगह-जगह हुये पिकदान के अलावा बदबू को बर्दाश्त नही कर पाए। कलेक्टर ने सिविल सर्जन से कहा आप रोज यही बैठती हो, लेकिन सभी जगह निरीक्षण नही करती है। इसीलिए यहां के बारे में जानकारी नही है। आज, अभी पूरे ट्रामा सेंटर की विधिवत पानी डालकर सफाई कराई जाय और खूद मौजूद होकर सफाई कराए और उसका वीडियों बनवाइए, फिर हमको भेजिए। कलेक्टर के तेवर ने यह जाहिर किया कि ट्रामा सेंटर की बदहाल स्थिति में कहीं न कहीं सिविल सर्जन की लापरवाही का नतीजा है। उन्हें कुछ भी जानकारी ट्रामा सेंटर के बारे में नही है, जब भी कलेक्टर कोई सवाल पूछतें, वह दूसरे चिकित्सको से पूछने लगते हैं, कलेक्टर ने टोका भी, की आप बाहर से आई हैं क्या, तो सिविल सर्जन ने कहा नही मैं यही पदस्थ थी। तब कलेक्टर ने कहा की इसके बावजूद भी आपको कोई जानकारी नही है।
लक्ष्य 20 और 6 भर्ती पाए गये कुपोषित बच्चे
कलेक्टर गौरव बैनल जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर का निरीक्षण करने के बाद एनआरसी का निरीक्षण करने पहुंचे। जहां खनुआ और माड़ा के अलावा जयंत े से कुपोषित बच्चे भर्ती पाए गये। कलेक्टर ने सीएमएचओ से जानकारी मांगा की एनआरसी में कितने बच्चों को भर्ती कराने का लक्ष्य है। जहां जानकारी दी गई कि 20 का लक्ष्य है, लेकिन लक्ष्य के अनुरूप एनआरसी में बच्चे नही पाए गये। महज छ: ही कुपोषित बच्चे भर्ती पाए गये, जिसपर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुये कहा कि शासन स्तर से निर्देश दिये गये हैं कि गांव-गांव कुपोषण को लेकर प्रचार-प्रसार किया जाए। महिला बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग का यह संयुक्त उपक्रम है। आंगनवाड़ियों को इसकी जानकारी दी जाए, ताकि कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया जाए और कुपोषण से हम जीत सकें।
नियमित कराएं साफ-सफाई, रोज बदलें बेडशीट
कलेक्टर ने सिविल सर्जन को निर्देशित किया कि वार्डों की नियमित साफ.-सफाई सुनिश्चित की जाए, मरीजों के बेडशीट समय पर बदले जाएं तथा मरीजो को दिए जाने वाले भोजन की नियमित उपलब्धता बनी रहे। उन्होंने चिकित्सालय की लॉन्ड्री मशीन को तत्काल शुरू के निर्देश भी दिए। गर्मी के मद्देनजर वार्डों में बंद पड़े एसी एवं कूलर को शीघ्र सुधार कर चालू करने के निर्देश दिए। साथ ही इमरजेंसी, आईसीयू एवं एसएनसीयू जैसे संवेदनशील वार्डों में 24 घंटे स्टाफ की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एसएनसीयू वार्ड में रजिस्टर संधारण को व्यवस्थित करने के साथ-साथ एसएनसीयू में शिशु मृत्यु के संबंध में सुनियोजित समीक्षा किए जाने के निर्देश दिए।
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