सिंगरौली

Singrauli News: पत्नी ने किडनी दान कर पति को दी नई जिंदगी, जानिए एक पत्नी की हिम्मत, संघर्ष और जीवनदान की कहानी

Published on:

Follow
Singrauli News

Singrauli News: लंबी बीमारी से जूझते पति का जीवन बचाने के लिए पत्नी ने अपना धर्म ही नहीं निशया बल्कि वर्तमाम समाज में आए दिन हो रही नीले इस जैसी घटनाओं पर करारा प्रहार किया है। यह उस पत्नी के अपने पति क प्रति समर्पण और भारतीय संस्कृति का अप्रतिम उदाहरण है, जो जिले के नवजीवन विहार में रूने बानी अनुराधा दुबे ने प्रस्तुत किया है। पति के लम्बे इलाज और संबर्ष के बाद अनुराधा दुब अपने पति की जीवनदात्री बन गयी हैं, इतना ही नहीं उन्होंने अपने साहस और समर्पण का भी संदेश दिया है। किडनी रोगियों की बढ़ती संख्या के बीच एक प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जहां एक पत्नी ने अपने पति को किडनी दान कर नई जिंदगी दी है।

जानकारी के मुताबिक अनुराधा दुबे ने अपने पति प्रभात पंकज दुबे को किडनी दान कर न सिर्फ उनका जीवन बचाया बल्कि समाज के सामने त्याग और समर्पण की मिसाल भी पेश की है। बताया जा रहा है कि पंकज दुबे नवजीवन विहार सेक्टर नंबर-1 के निवासी हैं। वे लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। देश के कई बड़े अस्पतालों में उपचार और जांच के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अंततः चिकित्सकों ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी। जिसके बाद परिवार सकते में आ गया था, इस संकट से उबरने और कठिन समय में अनुराधा दुबे अपने पति की जीवनदायिनी बनी। उन्होंने आगे बढकर पति को किडनी दान करने का निर्णय लिया। परिवार के लोगों को अपनी इच्छा बतायी और पति का जीवन बचाने के लिए आगे आईं।

कम्पनी का भी मिला सहयोग

अनुराधा ने बताया कि मेरे पति अडानी पॉवर में काम करते हैं। उनकी बीमारी के दौरान लीव विद पे किया गया। साथ ही अन्य प्रकार से हमें आर्थिक सहयोग मिला, हमारे अच्छे कार्यों और सकारात्मक सोंच का परिणाम भी सकारात्मक रहा अंततः मेरा आपरेशन और मेरे पति को किडनी ट्रांसप्लांट दोनों सफल रहा। हम सभी के शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने हमारे इस संकट में साथ दिया।

चिकित्सकों के साक्षात्कार में खरी उतरी अनुराधा 

चिकित्सकों के किडनी ट्रांसप्लांट करने पर जीवन बचने की सलाह पर ही अनुराधा ने अपनी किडनी दान देने का मन ही मन निर्णय ले लिया था, लेकिन इसके बाद भी किडनी दान की करने की स्वेच्छा के बावजूद चिकित्सकों, अस्पताल प्रबंधन और काउंसलर्स के गहन साक्षात्कार से गुजरना पड़ा। विस्तृत चिकित्सीय जांच के बाद भी यह सुनिश्चित करना पड़ा कि किडनी का दान किसी के दबाव में तो नहीं दिया जा रहा है। यह एक कानूनी प्रक्रिया है कि दानकर्ता को किसी प्रकार के लालच अथवा दबाव में नहीं होना चाहिए, तभी किडनी या कोई अंगदान दिया जा सकता है। उन बारीकियों पर अनुराधा खरी उतरीं।

सामान्य जीवन जी रहे पति-पत्नी

कई महीनों तक चली चिकित्सकीय प्रक्रिया और देखरेख के बाद किडनी का ऑपरेशन सफल रहा। वर्तमान में पति व पत्नी दोनों स्वस्थ हैं और नियमित जांच के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं। अनुराधा ने अपने अदम्य साहस से समाज व परिवार में जो मिशाल प्रस्तुत की है, वह अनुकरणीय है, वर्तमान में रील की बजाय रियल लाइफ जीने वाली महिला ने हर किसी को प्रभावित किया है।

पत्नी ने पति को दिया जीवनदान 

अनुराधा दुबे ने कहाकि ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय हिम्मत और धैर्य से काम लेने की जरूरत है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मेरे ससुराल के लोगों ने भी सहयोग किया, इसके अलावा मायके पक्षा से भी बहुत सपोर्ट मिला। उन्होंने आग्रह किया कि यदि किसी प्रकार की बीमारी है, तो पहले जांच कराए और जरूरत पडने पर अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच रखें। बताया कि उन्हें भी किडनी ट्रांसप्लांट से पहले अस्पताल प्रबंधन द्वारा विस्तृत जांच और साक्षात्कार की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसमें सुनिश्चित यह किया गया कि दान किसी दबाव में नहीं हो रहा है।

ये भी पढ़े-

MP News: चलती कार में लगी आग, डॉक्टर की पत्नी जिंदा जली, पति बचा

Navratri Bhog Recipe: नवरात्र पर भोग के लिए बनाएं ये खास लड्डू